75 दिवसीय भारतीय भाषा उत्सव में ‘मूल्य शिक्षा का महत्त्व’ पर सेमिनार आयोजित

शिक्षा में परंपरा और नवीनता का मिश्रण जरूरी- प्रो. जैन

लाडनूँ 9 नवम्बर 2023। एनसीटीई एवं यूजीसी प्रायोजित ‘भारतीय भाषा उत्सव’ के 11 दिसम्बर तक चलने वाले 75 दिवसीय कार्यक्रम में यहां जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में विभाग ‘मूल्य शिक्षा का महत्त्व’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रभारी कुलसचिव व विभागाध्यक्ष प्रो. बनवारी लाल जैन ने कहा कि मूल्य शिक्षा व्यक्तियों के व्यक्तित्व विकास पर जोर देती है, ताकि उनका भविष्य संवर सके और कठिन परिस्थितियों से आसानी से निपटा जा सके। यह बच्चों को ढालता है, ताकि वे अपने सामाजिक, नैतिक और लोकतांत्रिक कर्तव्यों को कुशलतापूर्वक संभालते हुए बदलते वातावरण से जुड़ जाएं, क्योंकि एक शिक्षक ही विद्यार्थी को समाज के प्रति उसके उत्तरदायित्वों को वहन करने की क्षमता विकसित करता है। शिक्षक का मुख्य काम अपने विद्यार्थी के वर्तमान और भविष्य को ध्यान में रखकर शिक्षा दे। शिक्षा में परंपरा और नवीनता का मिश्रण होना चाहिये। विद्यार्थी को केवल किताबी ज्ञान तक ही सीमित न रख कर उसे जीवन के व्यवहारिक ज्ञान की भी शिक्षा देनी आवश्यक है। विद्यार्थी को दी जाने वाली नैतिक मूल्यों की शिक्षा का प्रभाव उस पर जीवन पर्यंत बना रहता है। यह चरित्र निर्माण का आधार होता है। नैतिक मूल्यों के उत्थान में शिक्षक की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण रहती है। कार्यक्रम प्रभारी डॉ. सरोज राय ने कहा कि जीवन में जीवन मूल्य शिक्षा महत्वपूर्ण होती है। मूल्य शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक मूल्यों की क्षमताओं और अन्य व्यवहार को विकसित किया जाता है। मूल्य शिक्षा का मुख्य उद्देश्य अधिक नैतिक और लोकतांत्रिक समाज बनाना है। अंत में डा. अमिता जैन ने आभा ज्ञापित किया।

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