संस्कार निर्माण के साथ योग शिक्षा रोजगार प्राप्ति का भी साधन- प्रो. त्रिपाठी

एमए योग एवं जीवन विज्ञान के 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

लाडनूँ, 1 अप्रेल 2024। जैन विश्वभारती संस्थान के दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र द्वारा आयोजित एमए योग एवं जीवन विज्ञान के संपर्क एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए निदेशक प्रो. आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने कहा है कि योग आधुनिक समय की मांग बन चुका है। कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं बचा, जिसमें आज योग की दखल नहीं हो। योग सर्वांगीण विकास का आधार है, इससे व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं भावनात्मक विकास संभव होता है। उन्होंने जैन विश्वभारती संस्थान के लिए समर्पित विश्वविद्यालय बताते हुए कहा कि यहां योग का पाठ्यक्रम सबसे पुराना है और प्रारंभ से ही यहां योग का अध्ययन-अध्यापन हो रहा है। योग में कैरियर के बारे में बताते हुए उन्होंने बताया कि जैविभा विश्वविद्यालय से योग के अध्ययनापरांत विद्यार्थी शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, सेवा, वैकल्पिक चिकित्सा आदि क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि योग विषय से संस्कार निर्माण के साथ रोजगार प्राप्ति भी आसानी से उपलबध होती है। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए प्रेरित करते हुए एवं कोई कोताही नहीं बरतने की सलाह देते हुए कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से जो जितना सिद्धहस्त होगा, वह उतना ही सार्वजनिक जीवन में अधिक सफल रहेगा। कार्यक्रम का संयोजन करते हुए डॉ. जेपी सिंह नियमितता के महत्व पर विशेष जोर देते हुए समयबद्ध जीवनचर्या का जीवन में महत्व बताया। उन्होंने 15 दिवसीय कार्यक्रम की निर्धारित समय-सारणी भी प्रशिक्षणार्थियों के समक्ष प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में संस्थान के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रद्युमन सिंह के नेतृत्व में डॉ. युवराज सिंह खंगारोत, डॉ. अशोक भास्कर, डा. हेमलता जोशी, डॉ. विनोद कस्वां एवं दशरथ सिंह द्वारा विद्यार्थियों को अध्ययन और प्रशिक्षण कराया जाएगा। पंकज भटनागर, प्रगति चैरडिया एवं डॉ. आयुषी शर्मा इस कार्यक्रम में सहयोगी रहेंगे

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