पर्युषण पर्व के अवसर पर क्षमापना समारोह का आयोजन

राग-द्वेष-मुक्ति का मार्ग है पर्युषण पर्व: मुनि विमल कुमार

लाडनूंँ, 9 सितम्बर, 2016। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के तत्त्वावधान में भिक्षु विहार में मुनि विमल कुमार के सान्निध्य में पर्युषण पर्व का आयोजन समारोह पूर्वक किया गया। मुनिश्री ने उपस्थित विश्वविद्यालय परिवार को संबोधित करते हुए कहा कि पर्युषण पर्व राग-द्वेष से मुक्त होकर शांति का मार्ग है। उन्होंने कहा कि एक साथ काम करने से बहुत बार व्यक्ति को अनुकूल-प्रतिकूल व्यवहार का सामना करना पड़ता है लेकिन परस्पर क्षमा का भाव ही उसके विकास में सहायक बनता है। मुनिश्री ने कहा कि क्षमा करने वाला व्यक्ति ही जीवन में मन, वचन व कर्म से शुद्ध रह सकता है।

जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि भारतीय संस्कृति में विविध पर्व एवं त्यौहार मनाये जाते हैं लेकिन जैन धर्म का पर्युषण पर्व विशिष्ट पर्व है। इस पर्व के माध्यम से शुद्ध मन, भाव से क्षमायाचना की जाती है, जो व्यक्ति को शांति की ओर ले जाती है। मुनि धन्यकुमार ने गीतिका के माध्यम से अपने विचार रखे। मुनि मधुर कुमार ने पर्व की विशेषता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. अनिलधर, विशेषाधिकारी विनोद कुमार कक्कड़, नेपालचन्द गंग सहित सभी सदस्य उपस्थित थे।

इससे पूर्व कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ की अध्यक्षता में महाप्रज्ञ सभागार में क्षमापना पर्व का आयोजन किया गया, जिसमें कुलसचिव प्रो. अनिलधर, डाॅ. विजेन्द्र प्रधान, डाॅ प्रद्युम्नसिंह शेखावत, डाॅ. योगेश जैन, डाॅ. युवराजसिंह, डाॅ. जसवीर सिंह, श्री नेपालचंद गंग, डाॅ. रविन्द्र सिंह, डाॅ. नुपुर जैन, डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज सहित अनेक लोगों ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संयोजन डाॅ. विवेक माहेश्वरी ने किया।

इसी प्रकार आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय एवं शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में संवत्सरी पर्व का आयोजन कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ की अध्यक्षता में मनाया गया। प्रो. दूगड़ ने कहा कि क्षमा वीरों का आभूषण है। संवत्सरी को जैन पर्वों का पर्वाधिराज बताते हुए आपसी राग-द्वेष भूलकर मैत्री-भाव अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में डाॅ. मनीष भटनागर, डाॅ. जुगल दाधीच, सुश्री पूजा जैन, सुश्री नुपुर जैन, एवं छात्राएँ विमला, निकिता दाधीच, रश्मि बोकड़िया आदि ने अपने विचार रखे। संचालन डाॅ. गिरिराज भोजक ने किया।

Read 1303 times

Latest from