अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस का आयोजन

मानवता की रक्षा के लिए गांधी के विचार प्रांसगिक - प्रो. दूगड़

लाडनूंँ, 30 सितम्बर, 2016। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के अहिंसा एवं शांति विभाग के तत्वावधान में सेमीनार हॉल में अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस का आयोजन कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ की अध्यक्षता मेें रखा गया। प्रो. दूगड़ ने सभा को संबोधित करते हुए अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस की महत्ता को रेखांकित करते हुए अहिंसा एवं शांति की स्थापना को विश्व स्तर पर जरूरी बताया। कुलपति ने कहा कि विश्व के सामने शांति के अलावा कोई विकल्प नहीं है। अहिंसा एवं शांति के मार्ग पर चलकर ही मानवता की रक्षा की जा सकती है। उन्होंने महात्मा गांधी को महामानव की संज्ञा देते हुए उनके कार्यों को प्रांसगिक बताया। प्रो. दूगड़ ने अहिंसा एवं शांति के लिये विश्व स्तर पर किये जा रहे प्रयासों में और अधिक गति लाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर समाज कार्य विभाग के प्रो. आर.बी.एस. वर्मा ने अहिंसक समाज संरचना के लिए शांति एवं सहनशीलता को जरूरी बताया। कुलसचिव प्रो. अनिल धर ने कहा कि मनुष्य स्वभाव से ही अहिंसक है। उन्होंने महात्मा गांधी के राजनीतिक एवं आर्थिक चिंतन को प्रस्तुत किया। प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने अहिंसक आन्दोलनों द्वारा देश को मिली स्वतंत्रता को अहिंसा की जीत बताया। कार्यक्रम में राकेश कुमार जैन, मोनिका भाटी, सुरेन्द्र सिंह आदि ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विकास शर्मा ने एवं आभार ज्ञापन डॉ जुगल दाधीच ने व्यक्त किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में भी गांधी जयन्ती का आयोजन किया गया।

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