सांस्कृतिक एवं साहित्यिक प्रतियोगिताएँ आयोजित

लाडनूँ, 07 दिसम्बर, 2016। संस्थान के शिक्षा विभाग में आयोजित दो दिवसीय सामुहिक क्रियात्मक विकास के अन्तर्गत सांस्कृतिक एवं साहित्यिक प्रतियोगिताओं का उद्घाटन सामुहिक सरस्वती वंदना के साथ प्रो. बनवारीलाल जैन की अध्यक्षता में किया गया। जैन ने अपने उद्बोधन में प्रतियोगिताओं के उद्देश्य एवं इसकी महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी में कला छुपी होती है। अपनी कला को प्रस्तुत करने का यह अवसर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास करने में सहायक है। डाॅ मनीष भटनागर ने कार्यक्रम की सफलता हेतु शुभकामनाएं प्रेषित की गई। प्रतियोगिताओं के अन्तर्गत सामुहिक लोक एवं फिल्मी गीत, नाटक, मेहंदी, रंगोली प्रतियोगिताओं का मूल्यांकन डाॅ. पुष्पा मिश्रा, डाॅ सरोज राय, डाॅ विवेक माहेश्वरी, डाॅ अमिता जैन, सुश्री पूजा जैन ने किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ आभा सिंह एवं डाॅ अदिति गौतम द्वारा किया गया। मंच संचालन एम.एड. छात्रा पूजा वशिष्ट एवं मोनिका सिंह ने किया।

08 दिसम्बर, 2016। प्रतियोगिताओं के समापन अवसर पर सामूहिक लोकनृत्य एवं फिल्मी नृत्य, वाद-विवाद, डम्बशिराज, अनुपयोगी सामग्री का उपयोग के मूल्यांकन हेतु निर्णायक के रूप में डाॅ. श्वेता जैन, सुश्री अंकिता जांगिड व नरेन्द्र कुमार सैनी, डाॅ सरोज राॅय, डाॅ अमिता जैन व श्रीमती नुपुर जैन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन सत्र में जैन विश्वभारती संस्थान के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने अपने उद्बोधन में छात्राओं की प्रस्तुतियों को सराहनीय प्रयास बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को निरन्तर अपनी प्रतिभाओं को समयानुसार आगे लाने का प्रयास करना चाहिए। प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि विद्यार्थियों को हर कार्य में निपुण होना समय की मांग है एवं इस हेतु निरन्तर प्रयत्नरत रहना चाहिए। अंत में शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बनवारीलाल जैन ने छात्राओं की प्रतिभाओं को उनके लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया एवं कहा कि कला एवं संस्कृति जीवन का आधार है, जिसे संजोकर रखना विद्यार्थी की जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में मंच-संचालन एम.एड. छात्रा पूजा वशिष्ठ एवं रागिनी शर्मा ने किया।

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