जैन विद्याओं के विकास के लिये जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में संचालित होंगे अनेक लघु अवधि पाठ्यक्रम

जैन दर्शन के विकास के लिये विभिन्न कार्ययोजनाएँ तैयार

लाडनूँ, 21 सिम्बर, 2016। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय में जैन विद्याओं एवं जैन दर्शन को प्रोत्साहन दिये जाने के लिये विशेष कार्य किया जा रहा है। इसके अन्र्तगत जैन विद्या से सम्बद्ध अनेक विषयों पर छोटे-छोटे पाठ्यक्रमों का निर्माण व संचालन का कार्य चल रहा है। प्रारम्भ में दस विषयों पर कोर्स चलाये जाने का कार्य किया जायेगा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने बताया कि देशभर के दस वरिष्ठतम विद्वानों की एक कार्यशाला आयोजित की जाकर इस पर गहन विचार-विमर्श किया गया तथा ऐसे अनेक विषयों का चयन कर उन पर पाठयक्रम तैयार किये जा रहे हैं। प्रो. दूगड ने बताया कि जैन जीवनशैली, जैन पर्यावरण विज्ञान, जैन ज्योतिष, जैन प्रबन्धन, जैन आहार-विज्ञान, पांडुलिपि विज्ञान, जैन मनोविज्ञान व जैन कलह-प्रबंधन जैसे विषयों पर दो चरणों में काम किया जाकर उनके लघु-अवधि पाठ्यक्रम निर्माण करने के उपरान्त उनका संचालन विश्वविद्यालय में किया जायेगा। इनके अलावा कुछ अन्य विषय जैन शिल्प, जैन वास्तु, जैन कला, जैन शिक्षा, जैन ब्रह्मण्ड विज्ञान व जैन गणित के पाठ्यक्रम भी स्वीकृत किये गये हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एम.आर. गेलड़ा, प्रो. जिनेन्द्र जैन, प्रो सुषमा सिंघवी, प्रो. रविन्द्र कुमार वशिष्ठ, प्रो. दामोदर शास्त्री, प्रो. ए.पी. त्रिपाठी, प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा, प्रो. समणी चैतन्यप्रज्ञा, प्रो. समणी कुसुम प्रज्ञा व डाॅ. मनोज श्रीमाल ने इस कार्यशाला में भाग लेकर जैन विद्याओं एवं उससे सम्बद्ध अन्य शाखाओं के पाठ्यक्रमों को स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में निश्चय किया गया कि इन पाठ्यक्रमों के लिये न्यूनतम तीन माह की अवधि के कोर्स होंगे तथा माह में कम से कम 3 से 5 दिन कक्षाओं का आयोजन किया जायेगा। इन कोर्सेज के लिये दिये जाने वाले व्याख्यानों की वीडियो रिकाॅर्डिंग की जाकर उन्हें विभिन्न चैनलों व वेबसाईट्स पर भी प्रसारित किया जायेगा।

इन विद्वानों को दिया गया जिम्मा

प्रारम्भ में दस विषयों पर कोर्स को अन्तिम रूप दिये जाने के लिये प्रो. दामोदर शास्त्री को अधिकृत किया गया है। इनके अलावा सिलेबस डिजाइन करने के लिये जैन जीवनशैली व पर्यावरण-विज्ञान विषयों के लिए प्रो. प्रेमसुमन जैन, प्रो. एमआर गेलड़ा, प्रो. सुषमा सिंघवी, प्रो. एन.एल. कछारा, प्रो. नलिन शास़्त्री व प्रो. अनेकांत जैन को जिम्मा दिया गया है। जैन-ज्योतिष का जिम्मा प्रो. ईश्वर भट्ट, प्रो. वासुदेव, प्रो. सुदेश कुमार, डाॅ. विनोद कुमार शर्मा व डाॅ. मनोज श्रीमाली को दिया गया है। कलह-प्रबंधन विषय के लिये डाॅ. गौरव बिस्सा व डाॅ. राजेश जैन, पाण्डुलिपि विज्ञान के लिये प्रो. जिनेन्द्र जैन, प्रो. रविन्द्र कुमार वशिष्ठ, प्रो. कल्पना सेठ व प्रो. उत्तम सिंह को एवं प्राकृत भाषा के लिये प्रो. उदयचंद, प्रो. फूलचंद, प्रो. राधावल्लभ त्रिपाठी, प्रो. सुषमा सिंघवी, प्रो. जीसी त्रिपाठी, प्रो. भागचंद भास्कर व प्रो. भागचंद भागेन्दु को जिम्मेदारी सौंपा गई है।

जैन विद्या प्रसार व विकास के लिये अन्य योजनाएँ

कुलपति प्रो. दूगड़ ने बताया कि कार्यशाला में शामिल विद्वानों ने यह भी तय किया कि जैन लाॅ (जैन विधि) का एक अध्याय स्नातक व स्नातकोत्तर स्तर पर चलने वाले विधि-पाठ्यक्रमों में शामिल किये जाने के लिये बार-कौंसिल आॅफ इंडिया से वार्ता की जाये। यह भी तय किया गया है कि हर वर्ष जैन विद्या संगोष्ठी का आयोजन किया जाये, जो प्रो. एम.एल. गेलड़ा के निर्देशन में आयोजित की जायेगी। उन्होंने बताया कि इन लघुअवधि पाठ्यक्रमों के अलावा जैन-विद्या के विकास की सोच के अन्तर्गत ही महिलामण्डल के तत्त्वावधान में यहाँ जैन विद्या के विकास की दिशा में संस्कृत व प्राकृत भाषाओं के छह-छह माह के प्रमाण-पत्र पाठ्र्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। जैन विद्या पर संस्थान में पाक्षिक व्याख्यानमाला का आयोजन शुरू किया गया है। जैन विद्या परियोजनाओं के विकास के लिये कार्यशाला का आयोजन एवं मार्गदर्शिका तैयार करने का काम भी किया गया है। देश भर के जैन विद्वानों से सम्पर्क करके उन्हें हर माह कम से कम 5 से 7 दिन इस विश्वविद्यालय में समय देने के लिये आग्रह किया गया, जिनमें से अनेक विद्धानों ने अपनी स्वीकृति भी प्रदान कर दी है।

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