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आचार्य तुलसी संगीत विभाग का उद्घाटन

आचार्य तुलसी संगीत विभाग का उद्घाटन

संगीत सीखना सबके लिए आवश्यक है, जरूरी नहीं वह प्रोफशनल बने- पद्मश्री रिकी केज

लाडनूँ, 29 मार्च 2026। संस्थान में आचार्य तुलसी संगीत विभाग का उद्घाटन अन्तर्राष्टीय संगीतकार व पर्यावरणविद् ग्रेमी अवार्ड विजेता पद्मश्री रिकी केज द्वारा रविवार को फीता खोलकर एवं शिलालेख अनावरण करके किया गया। इस अवसर पर संगीतकार रिकी केज ने कहा कि संगीत की शिक्षा सबके लिए आवश्यक होनी चाहिए। ऐसा नहीं होता कि संगीत सीखने वाला हर व्यक्ति प्रोफेशनल संगीतकार बने। विज्ञान और गणित पढने वाला हर विद्यार्थी वैज्ञानिक नहीं बनता है, वैसे ही संगीत सीखने वाला हर विद्यार्थी इस क्षेत्र में ही प्रसिद्धि पाए, आवश्यक नहीं है। उन्होंने संगीत को सबके लिए जरूरी बताते हुए कहा कि संगीत से विद्यार्थी का विकास होता है, सबको गाना आना चाहिए। उन्होंने जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के परिसर की हरितिमा और सुंदरता को सराहनीय बताया और कहा कि यहां सगीत की शिक्षा शुरू करने के लिए अलग से विभाग की स्थापना अपने आप में महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने उन्हें विश्वविद्यालय में संगीत विभाग के तहत शुरू किए जाने वाले पाठ्यक्रमों की जानकारी दी और संगीत को भारतीय संस्कृति का अभिन्न एवं महत्वपूर्ण अंग बताया।

विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए राजस्थानी लोकगीत

उनके आगमन एवं उद्घाटन कार्यक्रम में कुलपति प्रो. बचछराज दूगड़ ने रिकी केज को पुष्पगुच्छ प्रदान करके उनका स्वागत किया। विद्यार्थियों ने भी इस अवसर पर उनके स्वागत में संगीतमय स्वागत गीत प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों की संगीत प्रस्तुति से रिकी केज प्रभावित हुए और उन्होंने कुछ गीत और प्रस्तुत करने की मंशा जाहिर की, जिस पर विद्यार्थियों ने उन्हें राजस्थानी लोकगीत सुनाए। ‘केशरिया बालम, आओ नीं पधारो म्हारै देश‘, ‘हरियाला बन्ना ओ, नादान बन्ना ओ‘, ‘नैणां रा लोभी कींकर आउं सा’ आदि राजस्थानी गीतों की शानदान प्रस्तुति वाद्ययंत्रों के साथ विद्यार्थियों ने दी। इस संगीत विभाग में हारमोनियम, तबला, बांसुरी, सितार, गिटार आदि एवं अन्य समस्त प्रकार के भारतीय वाद्ययंत्रों और अन्य संसाधनों की व्यवस्था की गई है। विश्वविद्यालय में क्लासिकल संगीत पर पाठ्यक्रमों का संचालन शुरू किया जा रहा है।

इन सबकी रही उपस्थिति

इस अवसर पर कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़, जैन विश्व भारती के अध्यक्ष अमरचंद लूंकड़, परिसर संयोजक धरमचंद लूंकड़, राजेश खटेड़, कमल नाहटा, शांतिलाल बैद, विश्वविद्यालय के कुलसचिव देबाशीष स्वामी, डाॅ. लिपि जैन, प्रो. बीएल जैन, प्रो. लक्ष्मीकांत व्यास, प्रो. रेखा तिवाड़ी, डाॅ. अमिता जैन, आरके जैन, डाॅ. बलबीर सिंह चारण, डाॅ. रविन्द्रसिंह राठौड़, पंकज भटनागर, डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज, डाॅ. प्रगति भटनागर, डाॅ. जेपी सिंह, स्नेहा शर्मा, अभिषेक चारण, महिमा जैन, देशना चारण, दशरथ सिंह आदि एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संाचालन डाॅ. लिपि जैन ने किया।

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