चित्तौड़गढ़, उदयपुर एवं माउंट आबू का तीन दिवसीय शैक्षिक भ्रमण ज्ञानवर्धक एवं यादगार रहा
लाडनूँ, 17 अक्टूबर 2026। जैन विश्व भारती संस्थान के शिक्षा विभाग द्वारा कुलपति महोदय एवं विभागाध्यक्ष प्रोफेसर बी एल जैन के मार्गदर्शन में शैक्षिक भ्रमण का आयोजन किया गया| विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक धरोहरों का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय शैक्षिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं यादगार रहा। 13 से 15 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने चित्तौड़गढ़, उदयपुर और माउंट आबू के प्रमुख ऐतिहासिक स्मारकों, धार्मिक स्थलों, झीलों तथा प्राकृतिक दर्शनीय स्थलों का अवलोकन किया। इस यात्रा ने राजस्थान के इतिहास, स्थापत्य कला, धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक परंपराओं को निकट से समझने का अवसर प्रदान किया। भ्रमण के प्रथम दिन विद्यार्थियों ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग का अवलोकन किया। विशाल दुर्ग, प्राचीन प्रवेश द्वार, मंदिरों, ऐतिहासिक दीवारों तथा पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी ने विद्यार्थियों को प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला और शिल्प कौशल से परिचित कराया। चित्तौड़गढ़ भ्रमण के बाद विद्यार्थियों ने रात्रि में प्रसिद्ध सांवलिया सेठ मंदिर में दर्शन किए। विद्यार्थियों ने भजन मंडली के साथ नृत्य में भाग लिया तथा मंदिर के बाहर आयोजित गरबा और डांडिया उत्सव का आनंद लिया। इस अनुभव ने उन्हें धार्मिक आस्था, सामूहिक सहभागिता और भारतीय लोक संस्कृति की जीवंतता से परिचित कराया। दूसरे दिन विद्यार्थियों ने झीलों की नगरी उदयपुर का भ्रमण किया। पिछोला झील में नौकायन करते हुए उन्होंने झील के बीच स्थित जग मंदिर तथा ताज लेक पैलेस के मनोरम दृश्य देखे। इसके बाद करणी माता मंदिर तक रोपवे से पहुँचकर उदयपुर शहर, अरावली पर्वतमाला और आसपास की झीलों का विहंगम दृश्य देखा। विद्यार्थियों ने प्रसिद्ध सिटी पैलेस का भ्रमण भी किया। तीसरे दिन विद्यार्थियों ने राजस्थान के प्रसिद्ध पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू का भ्रमण किया। अरावली पर्वतमाला की प्राकृतिक सुंदरता के बीच उन्होंने अर्बुदा देवी मंदिर, सोमनाथ महादेव मंदिर, अचलेश्वर महादेव मंदिर, गुरु शिखर, देलवाड़ा जैन मंदिर तथा नक्की झील का अवलोकन किया। 46 विद्यार्थियों के साथ संकाय सदस्य डॉ अमिता जैन, सुश्री स्नेहा शर्मा, श्री देवी लाल कुमावत का सहयोग रहा।




