लाडनूँ, 7 सितबर 2026। जैन विश्वभारती संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड के दिशानिर्देश एवं शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष,प्रो.बी.एल.जैन,समस्त संकाय सदस्य एवं छात्राध्यापिकाओं सहित आचार्य महाश्रमण के दर्शनार्थ उनके प्रवास स्थल पहुँचकर आचार्यश्री का आशीर्वाद एवं सान्निध्य प्राप्त किया। सर्वप्रथम शिक्षा विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने विभाग का परिचय देते हुए कहा कि यह विभाग मूल्य परक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में राजस्थान में विशिष्ट पहचान रखता है। अपने प्रेरणादायी व्याख्यान में गुरुदेव ने कहा कि ज्ञान प्राप्ति एक साधना है, जिसके लिए साधक को विशेष प्रयास करने पड़ते हैं तथा एकाग्रता के साथ पूर्ण समर्पण आवश्यक है। आचार्यश्री ने विद्यार्थियों को पांच अवगुणों से बचने की सीख देते हुए कहा कि विद्यार्थी को आलस्य छोड़कर परिश्रम एवं पुरुषार्थी होना चाहिए। ज्ञान प्राप्त करने के लिए विनम्रता आवश्यक है। अहंकार ज्ञान में बाधक है। क्रोध से विवेक और एकाग्रता नष्ट होती है, इसलिए विद्यार्थी को शांत रहना चाहिए। अध्ययन, समय और कर्तव्य के प्रति लापरवाही नहीं होनी चाहिए अर्थात प्रमाद नहीं करना चाहिए। विद्यार्थी को अपनी इंद्रियों, इच्छाओं और व्यवहार पर नियंत्रण रखना चाहिए अर्थात असंयम नहीं बरतना चाहिए। आलस्य, अहंकार, क्रोध, प्रमाद और असंयम से दूर रहकर विद्यार्थी विनम्रता, अनुशासन, परिश्रम, शांति और संयम को अपनाए। जब तक साधक या शिक्षार्थी इन बाधाओं पर विजय प्राप्त नहीं कर लेता वह सही मायने में ज्ञान प्राप्त करने में असमर्थ रहता है। उन्होंने कहा विनय या विनम्रता हमेशा अपने जीवन में अपनानी चाहिए, जो व्यक्ति विनीत है, उसको संपत्ति तथा अविनीत को विपत्ति या दुख प्राप्त होता है। अतः गुरु तथा ज्ञान के प्रति हमेशा विनयशील बनें, किसी भी कार्य में जल्दबाजी न करें तथा संयम के साथ कार्य को करने का प्रयास करेंद्यआप सभी भविष्य में शिक्षिकाएं बनेगी तो आपका दायित्व समाज के प्रति, अपने प्रति तथा अपने परिवार के प्रति और अधिक बढ़ जाता है। आप सभी यहां सीखे गए ज्ञान को, यहां की शिक्षा को समाज में प्रसारित करें तथा समाज को सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करें यही एक शिक्षक का कर्तव्य होता है। साथ ही पूज्यप्रवर ने छात्राओं निहारिका, अनोखा, निशा, मीनाक्षी द्वारा की गई जिज्ञासाओं का बड़े ही सरल और सहज प्रसंगों के साथ समाधान भी प्रस्तुत किया। व्याख्यान के उपरान्त सभी शिक्षा संकाय सदस्यों ने गुरुदेव के समक्ष अपना परिचय प्रस्तुत किया तथा अंत में कुलपति प्रोऋ दूगड ने संस्थान की ओर से गुरुदेव द्वारा प्रदत्त आशीर्वचनों के प्रति हार्दिक कृतज्ञता ज्ञापित की।



